Apan Jayal

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गुरुवार, 9 अगस्त 2012

11 माह में बिजली का यह दूसरा झटका

जयपुर। छीजत, चोरी व कुप्रबंधन के चलते घाटे में डूबी बिजली कम्पनियों ने एक बार फिर अपना भार जनता पर डाल दिया है। बिजली की दरें 25 पैसे से 80 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ा दी गई हैं। घाटे को कम करने के लिए बिजली चोरी रोकने की कोई कवायद करने के बजाय ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं पर ही ठीकरा फोड़ दिया गया। आम जनता की जेब पर 11 माह के अंतराल में बिजली का यह दूसरा झटका है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कम्पनियों की दरों की समीक्षा याचिका पर बुधवार को फैसला सुनाते हुए बिजली के दामों में करीब 18.58त्न की बढ़ोतरी की है।
घरेलू उपभोक्ता पर सर्वाधिक मार
आयोग के फैसले की सर्वाधिक मार घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ी है, जिनके अंतिम स्लेब में 80 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाए गए हैं। उद्योगों पर भी 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। बिजली कम्पनियों के गठन के बाद ये चौथी बार दरों में बढ़ोतरी की गई है।
किसानों व गरीबों का भार उठाएगी सरकार-गहलोत
यूं तो किसानों पर 25 पैसे प्रति यूनिट और बीपीएल पर प्रथम 50 यूनिट पर 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का भार डाला गया था। मगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की है कि ये भार सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करेगी। गरीब परिवारों और किसानों को पुरानी दर पर ही बिजली मिलती रहेगी। सरकार के मुताबिक नई दरों के बावजूद किसानों, बीपीएल परिवारों व 50 यूनिट तक उपभोग करने वाले परिवारों समेत कुल 56.47 लाख उपभोक्ताओं पर कोई भार नहीं पड़ेगा।