ग्रामबुगरड़ा स्थित गायत्री विद्या मंदिर शिक्षण माध्यमिक विद्यालय के छात्र मनोहर भाकर के गणित विषय के पुनर्मूल्यांकन में 40 अंक बढ़े हैं। इससे पूर्व छात्र के 10वीं बोर्ड परीक्षा में 81.67 प्रतिशत अंक थे जो उसका परिणाम संशोधित होने पर 88.33 प्रतिशत हो गया है। छात्र मनोहर भाकर ने बताया कि उसने हर विषय की तैयारी अच्छी से की थी और सभी विषय में 80 से 94 प्रतिशत तक अंक आए थे। गणित विषय में केवल 40 अंक आने पर मुझे पूर्ण विश्वास था कि इस विषय में कह कही मार्किंग में गलती रही है। संस्था निदेशक रामकिशोर रैवाड़ ने बताया कि बोर्ड द्वारा परीक्षा मार्किंग में इस तरह की गलतियों से छात्रों पर मानसिक रूप से गलत प्रभाव पड़ता है।
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शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016
शनिवार, 1 अक्टूबर 2016
दधिमति माता मंन्दिर गोठ व चामुण्डा माता मंदिर तरनाउ में नवरात्र महोत्सव की धूम
गोठ-मांगलोद स्थित दधिमति माता मन्दिर में नवरात्र महोत्सव आज से शुरू होगा। पुजारी ओमप्रकाश, गोपाल कृष्ण, कैलाशचन्द, नारायण प्रसाद ने बताया कि 18 वर्षों के बाद ऐसा महासंयोग आया है जब नवरात्र 9 की जगह पूरे 10 होंगे। घट स्थापना सुबह 8.15 बजे होगी। सप्तमी को माताजी की विशेष सवारी निकाली जाएगी जो मंदिर प्रांगण से कपाल कुण्ड तक जायेगी।
तरनाऊ में चामुण्डा भक्त मंडल द्वारा नवरात्र महोत्सव का आयोजन
तरनाऊ में चामुण्डा भक्त मंडल द्वारा नवरात्र महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति के अनिल सैन ने बताया कि मां चामुण्डा मंदिर नवरात्र स्थापना से पूर्व कलश यात्रा निकाली जाएगी।संस्कार स्कूल में मनाया गांधी सप्ताह
स्थानीयसंस्कार प्री स्कूल में गांधी सप्ताह के तहत महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित सजीव झांकी सजाई गई। कार्यक्रम में संस्था निदेशक रामकुंवार सोनी ने गांधीजी के जीवन चरित्र के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर संस्थान के किशन सोनी, आरती पारीक, पूजा सोनी, कृष्णा शर्मा, बिंदू सोनी ने भी विचार व्यक्त किए। प्रियांशु भाटी, तनीषा चतुर्वेदी, रामाकांत कांकाणी, कांता पूनियां, सलोनी सोनी, राजवीर लखारा ने विभिन्न किरदार अदा किए।
बुधवार, 28 सितंबर 2016
मुकेश डिडेल बने एबीवीपी के नगर अध्यक्ष
एबीवीपी की नगर कार्यकारिणी की घोषणा जिला संगठन मंत्री सौरव फौजदार जिला संयोजक मनीष काला के द्वारा की गई। कांकाणी भवन में आयोजित अभ्यास वर्ग में जिला संगठन मंत्री ने एबीवीपी के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर एबीवीपी जिला संयोजक ने नगर इकाई की घोषणा की। जिसमें मुकेश डिडेल को नगर अध्यक्ष, दिनेश लोमरोड़ को नगर मंत्री, रिछपाल बासठ, सुरेश रलिया, मुकेश रिणवां को नगर उपाध्यक्ष, रामानुज शर्मा, सुखदेव बिश्नोई, तिलोक बिडियासर दिनेश बासठ को नगर संगठन मंत्री नियुक्त किया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष हरेंद्र रोज, श्रीराम चतुर्वेदी, सीताराम लोमरोड़, गोविंद चोब्या, दिनेश बिश्नोई, राकेश चोटिया, पुनीत बिश्नोई माैजूद थे।
शनिवार, 24 सितंबर 2016
देश भर में सबसे महंगी हुई राजस्थान में बिजली
http://apnajayal.blogspot.in/
प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर सरकार की मार लगातार बढ़ती जा रही है। अगर पड़ोसी राज्यों से तुलना की जाए तो राजस्थान इकलौता ऐसा प्रदेश बन गया है, जहां मध्यमवर्ग के परिवारों को भी लगभग 7 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिल का भुगतान करना पड़ रहा है।
नए आदेशों के अनुसार को सितम्बर माह से बिजली उपभोग राशि का भुगतान नई दरों से करना होगा। बिजली कंपनियों ने गठन के बाद सातवीं बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की है। यही नहीं पड़ोसी राज्यों में तुलना में प्रदेश में बिजली दरों में प्रदेश अव्वल नंबर पर आ गया है।
बिजली दरों के मामले में पड़ोसी राज्यों में श्रेणीवार बिजली दरों की तुलना में प्रदेश में बिजली दरें सर्वाधिक हो चुकी हैं और बिजली कंपनियों के वित्तीय घाटे में हो रही लगातार बढ़ोतरी व उदय योजना में मिले अनुदान की शर्तों के अनुसार बिजली कंपनियों को मिली छूट से आगामी समय में फिर से बिजली दरों में बढ़ोतरी होना भी लगभग तय है।
गलती कंपनियों की, भुगते जनता
बीते कुछ वर्षों में बिजली कंपनियों ने विद्युत उत्पादन कर रही कंपनियों से महंगी दरों पर बिजली खरीद की, जिसके चलते करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार कंपनियों पर पड़ा है। वहीं अब घाटे और वित्तीय भार की भरपाई कंपनियां प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से कर रही हैं। प्रदेश में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दरों पर हो रही बिजली खरीद बिजली कंपनियों के संचित घाटे को बढ़ा रही है वहीं छीजत और चोरी रोकने में नाकाम रही बिजली कंपनियों ने घाटे की भरपाई बिजली उपभोक्ताओं पर डालने की कार्यशैली अपना ली है।
छीजत- चोरी ने बढ़ाया घाटा
प्रदेश की बिजली वितरण निगमों में अब भी बिजली छीजत का ग्राफ 25 से 35 फीसदी तक बना हुआ है वहीं बिजली चोरी मामले में कई जिलों में छीजत 35 फीसदी तक रही है। राज्य सरकार के निर्देशों के बावजूद बिजली कंपनियां चोरी व छीजत रोकने में प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं। इसके उलट बिजली कंपनियों ने चोरी छीजत पर लगाम कसने के लिए संबंधित क्षेत्र के अभियंताओं के वेतन भत्ते में कटौती की तलवार भी लटकाई लेकिन नतीजा सिफर रहा है।
बिजली की बढी दरों का यूथ कांगेस ने किया विरोध
जायल में युवा कांग्रेस की बिजली दरों के विरोध में बैठक रखी गई। बैठक में बढ़ी हुई बिजली दरों का विरोध किया गया तथा कहां कि इससे किसान व आम जनता पर महंगाई के इस दौर में आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी। इस मौके पर युवा नेता झूमरराम डूकिया ने कहा कि सरकार की बिजली की दरें को बढ़ा रही पर किसानों के लिए मूंग का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा रही है। वहीं जिला महासचिव हनुमान बांगड़ा ने कहा कि सरकार महंगाई के मुद्दे पर पहले से ही विफल है। एक तरफ तो बिजली कटौती कर रही है और दूसरी तरफ बिजली की दरे बढा रही है। बैठक में जिला महासचिव राजेश रलिया, रूपाराम गोस्वामी, राधेश्याम शर्मा, जगदीश कुड़ी, रिद्धकरण डूकिया आदि उपस्थित रहे।
मंगलवार, 20 सितंबर 2016
गुरुवार, 12 जुलाई 2012
अपराजेय पहलवान रस्तमे हिन्द दारा सिंह रन्धावा
पहलवानी से लेकर फिल्मों में अपना जलवा दिखाने वाले रस्तमे हिन्द दारा सिंह रन्धावा का जन्म पंजाब में अमृतसर के धरमूचक गांव में जाट सिख परिवार में 19 नवंबर 1928 को हुआ था। बचपन से ही बलिष्ठ शरीर के दारा सिंह को पहलवानी का शौक रहा और अपने लाडले के इस शौक को पूरा करने में उनके पिता सूरत सिंह और माता बलवन्त कौर ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
बताया जाता है कि उनकी माताजी उन्हें भैंस के दूध के साथ बादाम की गिरियां, मक्खन और खांड में कूटकर खिलाती थीं और यही देसी नुस्खा इस पहलवान की अपराजेयता में संजीवनी का काम करता रहा। दारा सिंह और उनके छोटे भाई सरदारा सिंह ने कम उम्र में ही पहलवानी शुर कर दी और धीरे-धीरे गांव के अखाड़ों से लेकर देश-विदेश में अपने गांव का नाम रोशन किया।
मलेशियाई कुश्ती चैम्पियन बने -
दारा सिंह 1947 में सिंगापुर चले गए और उन्होंने वहां भारतीय स्टाइल की कुश्ती में मलेशियाई पहलवान तरलोक सिंह को हराकर मलेशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप जीती और फिर उन्होंने पेशेवर पहलवान के रप में सभी देशों में अपनी धाक जमा दी।
विश्व चैम्पियन किंगकांग को चटाई धूल -
दारा सिंह ने पेशेवर पहलवान के रूप में विदेशों में जमकर कुश्तियां लड़ीं और 1952 में भारत आए और यहां भी कुश्तियां लडते हुए 1954 में भारतीय चैम्पियन का खिताब हासिल किया। उन्होंने सभी राष्ट्रमंडल देशों में कुश्तियां लड़ीं और विश्व चैम्पियन किंगकांग को धूल चटाई।
1959 में राष्ट्रमंडल चैम्पियन बने -
दारा सिंह ने 1959 में कलकत्ता में राष्ट्रमंडल कुश्ती चैम्पियनशिप में कनाडा के चैम्पियन जार्ज गर्डियान्को और न्यूजीलैंड के जान डिसिल्वा के गुरर को तोड़ा और यह चैम्पियनशिप अपने नाम कर ली।
अपराजेय रहे -
वे फ्री स्टाइल कुश्तियों में एक मिसाल बन गए और 29 मई 1968 को अमरीका के विश्व चैम्पियन लाऊ थेज को हराकर प्री स्टाइल कुश्ती का विश्व चैम्पियन खिताब जीता। उन्होंने 1983 में कुश्ती से संन्यास लिया था और उस समय तक उन्हें अपराजेय पहलवान का दर्जा हासिल था। उन्होंने 500 से अधिक पेशेवर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
सब दुखी हैं 'हनुमान' की मौत पर
दारा सिंह के निधन के बाद पूरे बॉलीवुड और उनके प्रशंसको के बीच दुख की लहर फैल गई है। कलाकारों से लेकर आम आदमी तक अपने फेवरिट हीरो को अंतिम विदाई दे रहा है। दारा सिंह के निधन पर किसने क्या कहा, जानिए यहां।
अमिताभ बच्चन ने कहा है कि आज सुबह दारा सिंह जी नहीं रहे। एक महान भारतीय और बेहतरीन इंसान। गया। उनकी मौजूदगी में बिताया गया पूरा एक युग खत्म हो गया।
महेश भट्ट कहते हैं कि मैं बचपन से ही दारा सिंह का फैन था। उनके जाने से दुनिया उजड़ गई, ऐसा ही कुछ लग रहा है।
मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि मैं उनके जाने को शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूं। मैं उनका बचपन से फैन था। वह बहुत अच्छे इंसान थे। उनके जाने से मुझे काफी नुकसान हुआ है।
भाग्यश्री कहतीहैं कि मजबूत शरीर की पहचान दारा सिंह जी हमारे साथ नहीं रहे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने दारा सिंह की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि अखाड़े से लेकर बड़े परदे तक पर उन्होंने कई पीढ़ियों का दिल जीता। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
मनोज वाजपेयी कहते हैं कि मजबूत शरीर की पहचान दारा सिंह जी हमारे साथ नहीं रहे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
रविवार, 11 मार्च 2012
सीए से जानिए टैक्स रियायतों का कुछ खास फंड़ा
नौकरीपेशा लोग ऐसे किसी भी खर्च को दिखा नहीं पा रहे हैं, जिसका वे तर्कसंगत आधार दे सकें। हर साल आने वाले बजट की तरह इस वर्ष के केंद्रीय बजट से भी आम आदमी सरकार से टैक्स छूट की सीमा बढ़ाए जाने की उम्मीद कर रहा है। वेतनभोगियों को मिलने वाले भत्ते बच्चों की शिक्षा, परिवहन, मेडिकल आदि पर मिलने वाली छूट की सीमा उस समय तय की गई थी, जब देश में मुद्रास्फीति की दर बहुत कम थी।
इस बजट से ये उम्मीद
1. सेक्शन-80 सी के तहत आयकर की छूट सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर तीन लाख रुपए हो।
2. परिवहन एवं यातायात पर मिलने वाली टैक्स छूट 800 रुपए से बढ़ाकर 3200 रुपए प्रतिमाह हो।
3. 15000 रुपए तक के इलाज खर्च पर आयकर छूट है। इसे बढ़ाकर 50,000 रुपए किए जाने की उम्मीद।
4. वेतनभोगियों को 30 से 40 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलना चाहिए।
कॉर्पोरेट की तुलना में तनख्वाह वालों से जुड़ी ये विसंगति
खुली किताब है आय-खर्च वेतनभोगियों पर तो सैलेरी के साथ ही टैक्स लग जाता है। क्योंकि सैलेरी पहले से ही घोषित होती है। जबकि कॉर्पोरेट या बिजनेसमैन अपने खचरें को घटाकर आय भी दिखा सकते हैं। वे यह हिसाब अलग-अलग टैक्स को ध्यान में रखकर कर सकते हैं।
टैक्स छूट
वेतनभोगी को निर्धारित रकम में से अधिक से अधिक 1.20 लाख रुपए वापस मिलते हैं किन्तु अन्य किसी स्रोत की आवक से ऐसी कोई कटौती नहीं मिलती। पांच वर्ष पहले 30 हजार से अधिक स्टैंडर्ड डिडक्शन वेतनभोगियों को मिलता था। जो वेतनभोगियों के खर्च के रूप में दिया जाता था किन्तु उसे बंद कर दिया गया।
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